टीम ओए अफ़लातून

Shilpa Sharma Oye Aflatoon

शिल्पा शर्मा
को-फ़ाउंडर, एडिटर

अब तक कुल 22 वर्षों का पत्रकारिता व संपादन का अनुभव. कवयित्री, लेखिका और अनुवादक. टाइम्स ऑफ़ इंडिया ग्रुप की महिला पत्रिका फ़ेमिना हिंदी में लंबे अर्से तक संपादकीय टीम का प्रतिनिधित्व. इसके अलावा भी कई नामचीन संस्थानों में संपादकीय कार्यानुभव. उनके नाम एक कविता संग्रह, एक अश‘आर संग्रह और एक डिजिटल कहानी संग्रह दर्ज है.

Amrendra Yadav

अमरेन्द्र यादव
को-फ़ाउंडर, एग्ज़ेक्यूटिव एडिटर

साइंस ग्रैजुएट. प्रिंट और डिजिटल पत्रकारिता में 15 वर्षों से सक्रिय. टाइम्स ऑफ़ इंडिया की मैगज़ीन फ़ेमिना और पायोनियर (मेरी सहेली) ग्रुप की होममेकर में चीफ़ कॉपी एडिटर से लेकर असिस्टेंट एडिटर जैसे पदों पर काम करने का अनुभव. हेल्थ, रिलेशनशिप, लाइफ़स्टाइल, साहित्य, सिनेमा, और खेल जैसे विषयों पर लगातार लेखन. ओए अफ़लातून के माध्यम से सकारात्मक पत्रकारिता का एक मंच तैयार करने की कोशिश.

‘अफ़लातून’ दरअसल यूनान (ग्रीक या ग्रीस) के दार्शनिक प्लाटो का अरबी नाम है. यूं तो उनका नाम प्लाटोन था, लेकिन लैटिन से अंग्रेज़ी भाषा में आते आते ‘न’ शब्द ग़ायब हो गया और उनका नाम प्लाटो ही रह गया. फिर जब उनकी ख्याति अरब में पहुंची तो उनका नाम और बदल गया, क्योंकि अरबी में ‘प’ शब्द नहीं होता, बल्कि ‘फ’ होता है. तो अरब में आते आते प्लाटोन, फ्लाटोन बन जाना चाहिए था, लेकिन चूंकि अरबी लिपी में संयुक्त शब्द नहीं होते सो उनके नाम को फलाटोन बनना पड़ा. कालांतर में उनके नाम के आगे ‘अ’ जुड़ गया और वे बन गए अफलाटोन और अंतत: उनका नाम हो गया अफ़लातून.

तो इन्हीं दार्शनिक और विद्वान अफ़लातून, जो महान दार्शनिक सुकरात के शिष्य थे और विद्वान अरस्तू के गुरू, के नाम पर हमने अपनी हिंदी की लाइफ़स्टाइल वेबसाइट का नाम ‘ओए अफ़लातून’ रखा है.

मज़े की बात ये है कि आमतौर पर बातचीत के दौरान यूं ही जब किसी को ‘अफ़लातून’ कहा जाता है तो इसका बहुत सकारात्मक अर्थ नहीं होता. इसका अर्थ इस बात से लगाया जाता है कि वह व्यक्ति ख़ुद को अफ़लातून की तरह बहुत विद्वान समझता है. पर यदि हम सतत सीखते रहें तो विद्वान या अफ़लातून बनना कोई बड़ी बात भी नहीं. कई बार उन लोगों को भी अफ़लातून कहा जाता है, जो नई राह दिखाते हैं, नई राह बनाते हैं. ‘ओए अफ़लातून’ में हम इसी बात को मानते हैं कि ख़ुद को अपडेट करते हुए हम सभी अपनी ज़िंदगी के अफ़लातून तो बन ही सकते हैं.

यह हिंदी की एक ऐसी लाइफ़स्टाइल वेबसाइट हैं, जहां आपको भागती-दौड़ती ख़बरें तो नहीं मिलेंगी, लेकिन जीवन के हर पहलू को लेकर ऐसे आलेख ज़रूर मिलेंगे, जो आपको सोचने और समझने के लिए कुछ नए मुद्दे और नया दृष्टिकोण दें. कुल मिलाकर ये कि आपको अफ़लातून बनाने की ओर अग्रसर कर सकें.

हमारे कॉलमिस्ट, जो ‘ओए अफ़लातून’
को समृद्ध बनाते हैं

रचनाएं भेजने के नियम

  • रचनाएं oye.aflatoon@gmail.com पर ईमेल करें.
  • रचना के साथ अपना 150 शब्दों का परिचय और फ़ोटो भी संलग्न करें.
  • रचना मौलिक है, इस संदर्भ में जानकारी दें.
  • यदि भेजी गई रचनाओं पर 15 दिनों के भीतर जवाब नहीं आता है तो रचनाकार उन्हें अन्यत्र भेज सकते हैं.

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