ओ हरामज़ादे: कहानी विदेश में बसे एक भारतीय की (लेखक: भीष्म साहनी)
आप दुनिया में कहीं भी चले जाएं, पर अपने देश की बातें और यादें पीछा नहीं छोड़ती हैं. भीष्म साहनी ...
आप दुनिया में कहीं भी चले जाएं, पर अपने देश की बातें और यादें पीछा नहीं छोड़ती हैं. भीष्म साहनी ...
1947 में देश की आज़ादी अपने साथ विभाजन और विभाजन ने विस्थापन की सौगात दी थी. लाखों लोग सीमा के ...
बरसात की रातें, अक्सर अपने साथ कहानियां ले आती हैं. बरसात की यह तूफ़ानी रात भी कुछ ऐसी ही है. ...
यूं तो कहने को यह धरती सबकी है, पर इंसान अपने छल कपट से इसके शासक बन बैठे हैं. कमलेश्वर ...
सास-बहू का रिश्ता चूहे-बिल्ली के रिश्ते से कम दिलकश नहीं होता. इनके भाग्य में पहले ही दिन से दुश्मनी लिखी ...
कुछ लोग आज़ादी मिलने के पहले भी आज़ाद थे और कुछ लोग कभी आज़ाद नहीं हो सकते. इसी सच्चाई का ...
हम सब भगवान की शक्तियां चाहते हैं, पर भगवान की तक़लीफ़ साझा करने को लेकर उदासीन क्यों हो जाते हैं? ...
चन्द्रनाथ पड़ोस के घर की कुंती को रोज़ देखता था. उसे नहाते, कपड़े बदलते. वह चाहता था, एक दिन वह ...
एक लड़का अपनी बीमार मां के कहे अनुसार एक पुरानी आल्मारी खोलता है. आल्मारी खोलने के बाद उसके हाथ जो ...
हर घर में सास का एक रुतबा और अदब होता है. उम्र बढ़ने के साथ ही बूढ़ी हो रही सास ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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