शू लेस: मीनाक्षी विजयवर्गीय की कहानी
कई बार रिश्तों को जोड़ने वाली घटनाएं और कड़ियां इतनी मामूली-सी होती हैं, जिनके बारे में हम सोच भी नहीं ...
कई बार रिश्तों को जोड़ने वाली घटनाएं और कड़ियां इतनी मामूली-सी होती हैं, जिनके बारे में हम सोच भी नहीं ...
वे प्रेम कहानियां जो मुकम्मल नहीं होतीं एक अनचीन्हे से दर्द से भरी होती हैं. वे अव्यक्त सी प्रेम कहानियां, ...
किस तरह एक दिलफेंक पति ख़ुद बेचारा बन कर अपनी पहली और फिर दूसरी पत्नी के साथ बेवफ़ाई करता है ...
पहली बार चेरी के पेड़ों को देखने की बच्चों की ख़ुशी और चेरी न खा पाने की उदासी के बीच ...
आज़ादी के पहले की कालखंड की यह लघुकथा हिंदुओं और मुलमानों के बीच व्याप्त अविश्वास की पृष्ठभूमि पर लिखी गई ...
अपनी नवजात बच्ची को छोड़ रही एक मां की दर्दभरी दास्तां, पढ़ें मंटो की कहानी सड़क के किनारे में. “यही ...
पब्लिक ट्रान्सपोर्ट को किसी भी शहर की जीवनरेखा कहा जाता है. क्या होता है जब एक शहर में ट्राम कर्मचारी ...
हम एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग दो देश रहते हैं. कहानी राजधानी में लेखक ...
क्या प्रेम का अन्त कहानियों की तरह विवाह में ही होना आवश्यक है? इस सवाल के इर्दगिर्द बुनी गई एक ...
हम भयंकर अंतरविरोध वाले समाज में रहते हैं, बता रही है हरिशंकर परसाई की कहानी ‘प्रेम-पत्र और हेडमास्टर’. गुरु लोगों ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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