मुंह की बात: निदा फ़ाज़ली की कविता
मुंह के कारोबारी जब तरक़्क़ी कर रहे हों तो ख़ामोशी से अपनी राह बनानेवालों को भला कौन पूछेगा? निदा फ़ाज़ली...
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मुंह के कारोबारी जब तरक़्क़ी कर रहे हों तो ख़ामोशी से अपनी राह बनानेवालों को भला कौन पूछेगा? निदा फ़ाज़ली...
यदि दो लोगों के चेहरे मिलते हैं तो ज़रूरी नहीं कि उनके चरित्र भी मिलते हों. इस बात को उजागर...
आज हमें जानेमाने लेखक अशोक पांडे मिलवा रहे हैं ऐथ्लीट एलिज़ाबेथ उर्फ़ बेट्टी रॉबिन्सन की शख़्सियत से. उन्होंने न सिर्फ़...
सेक्स के विषय जानकारों के पास अक्सर इस तरह के सवाल आते रहते हैं कि सेक्स को अधिक संतुष्टि देने...
प्री-स्टिच्ड साड़ी या फिर जैसा कि आम भाषा में कहा जाता है रेडी टू वेयर साड़ी ने उन महिलाओं और...
विसंगियों के ग़ज़लकार दुष्यंत कुमार की यह ग़ज़ल कई विसंगत जोड़ियों को बेहद नज़ाकत से बताती है. जाने किस-किसका ख़्याल...
असाधारण दबावों और चुनौतियों का सामना करते हुए इसरो का चंद्रयान-3 बिल्कुल सटीक तरीक़े से उतर गया है. चंद्रयान-3 के...
बच्चों की परवरिश बच्चों का खेल नहीं है. हम उनसे स्नेह करते हैं, पर कभी-कभी हमें उन्हें सही आदतें सिखाने...
बालों की देखरेख का ज़ोर आज भी तेल लगाकर चम्पी करने और फिर शैम्पू कर लेने तक ही सीमित है....
नमक कहने को तो एक आम-सी चीज़ है, पर उसकी व्यापकता इस आम-सी चीज़ को ख़ास बनाने के लिए काफ़ी...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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