फ़िक्शन अफ़लातून#1 त्रिलोकी की दुल्हन (लेखिका: डॉक्टर संगीता झा)
कई बार हम अपने मन में कुछ बातें बिठा लेते हैं, पूर्वधारणाएं बना लेते हैं. लेकिन जब व्यावहारिक स्थिति से ...
कई बार हम अपने मन में कुछ बातें बिठा लेते हैं, पूर्वधारणाएं बना लेते हैं. लेकिन जब व्यावहारिक स्थिति से ...
मालकिन दीपा और सचहचरी सहायिका मीरा की बोरियत से भरती जा रही ज़िंदगी में तब रोमांचक आश्चर्य की एंट्री होती ...
क्रांतिकारी हमेशा दूसरों के घर में ही अच्छा लगता है. यह सच्चाई उस लड़की से बेहतर कौन जान सकता है, ...
ख़ूबसूरत लड़कियों को चिढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जानेवाला एक जुमला ‘अंगूर की बेल’ कैसे एक परिवार की तीन पीढ़ियों ...
वैसे तो हम हर रोज़ आईना देखते हैं, पर जीवन की कई सच्चाइयों को जानबूझकर देखने से कतराते रहते हैं. ...
‘नेक कर दरिया में डाल’ यानी अच्छा काम करके भूल जाएं. यह हमें बचपन से सिखाया जाता है. आप भले ...
हम दुनिया को अपना जो चेहरा दिखाते हैं, क्या हमारा वह एकमात्र चेहरा होता है? डॉ संगीता झा की यह ...
अक्षय तृतीया और ईद का एक ही दिन आना, उन लोगों के मन में सुनहरी यादों के जी उठने जैसा ...
धर्म और सियासत द्वारा अपने-अपने फ़ायदे के लिए रिश्तों में नफ़रत का ज़हर घोलने का काम किया जाता रहा है. ...
कई बार अंधविश्वास और मान्यताएं हमारे दिमाग़ में इस क़दर घर बना लेते हैं कि उनके चक्कर में हम किसी ...
हर वह शख़्स फिर चाहे वह महिला हो या पुरुष ‘अफ़लातून’ ही है, जो जीवन को अपने शर्तों पर जीने का ख़्वाब देखता है, उसे पूरा करने का जज़्बा रखता है और इसके लिए प्रयास करता है. जीवन की शर्तें आपकी और उन शर्तों पर चलने का हुनर सिखाने वालों की कहानियां ओए अफ़लातून की. जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर, लाइफ़स्टाइल पर हमारी स्टोरीज़ आपको नया नज़रिया और उम्मीद तब तक देती रहेंगी, जब तक कि आप अपने जीवन के ‘अफ़लातून’ न बन जाएं.
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